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Archive for April, 2018

समय आजकल कुछ ठीक से कटता नहीं
लोग भी आजकल कुछ खास नज़र नहीं आते

कुछ जो पहले साथ हुआ करते थे
उनको साथी मिल गया
बाकी जो कभी दिख जाते थे यहां वहाँ
उनको अब बन्द कमरों में ज्यादा सुकून है

और वक़्त भी जो पहले यूँ ही कट जाया करता था
वो आजकल काटने को दौड़ता है

बिस्तर उठा के कहीं निकल जाने में ही भलाई है।

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