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Archive for January, 2019

बीता साल कुछ यूं गुज़रा
दोस्त कुत्ते बने और कुत्ते दोस्त

जो चाहते थे, वो एक बार फिर ना कर सके
और कुछ अनचाहे पलों से रूबरू भी होना पड़ा

देखा जाए, तो मुझे गर्व नहीं है इस बीते साल पे
क्या कुछ गलतियां नहीं की, कोई कसर नहीं छोड़ी शायद

जहां भागना था वहां बैठे रह गए
जहां संभल के चलना था वहां आंख मूंद दौड़ पड़े

रास्ता बाएं ओर का था तो हम दीवाने दाएं चल दिए
मंज़िल खुद चलके भी आती तो हम मुह मोड़ लेते

पटाखों के शोर में कल जब दो पल शांति तलाश रहे थे
और इस सोच में डूबे थे कि आज ये जाम खुशी का बनेगा या गम का

तो एक पल को ये खयाल आया, कि शायद इसको देखने का नजरिया कुछ ठीक नहीं
शायद नए साल का मतलब सिर्फ पुराने पन्नों को पलटना नहीं

ये हमारे लिए एक और मौका है
कोरी किताब पे फिर से कुछ लिख जाने का

जो अब तक नहीं पा सके उसके पीछे फिर से दौड़ जाने का
और एक और मौका अपने सपनों के और करीब आने का

ये सिर्फ एक नया दिन नहीं को महज एक सेकंड में बदल गया था
ये एक नई ऊर्जा है जो पूरे तीन सौ पैंसठ दिन साथ रहने वाली है

बात बस थोड़ी थोड़ी समझ आ ही रही थी
और थोड़ा जोश जुटाकर हम भी कुछ नया लिखने बैठ गए थे

पर जो जाम आधा गले से उतर चुका था
सारे उत्साह कि धज्जियां उड़ाते हुए नींद के आगोश में कुछ यूं ले गया

कि क्या नया और क्या पुराना, सब पे रायता फैल गया।

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